हिंदी शायरी, हिंदी कहानी, स्वरचित रचना
किसी के आ जाने से भीड़ में खो जाने से किसी से हाथ मिलाने से बस पास मेरे आ जाने से बाजार में अब जाने को स्कूल से घर आने को जिन हाथो में प्यार था उनमे अब खून मुझे बस दिखता है एक दर्द सीने में उठना है हाँ माँ अब डर मुझे बहुत लगता है -VAIBHAVRV
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कुछ मुझ सा ही मुझमे रहता है। कौन हूँ मै बस रोज यही कहता है।।- वैभव रश्मि वर्मा
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