किसी के आ जाने से भीड़ में खो जाने से
किसी से हाथ मिलाने से बस पास मेरे आ जाने से
बाजार में अब जाने को स्कूल से घर आने को
जिन हाथो में प्यार था उनमे अब खून मुझे बस दिखता है
एक दर्द सीने में उठना है हाँ माँ अब डर मुझे बहुत लगता है -VAIBHAVRV
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
कुछ मुझ सा ही मुझमे रहता है। कौन हूँ मै बस रोज यही कहता है।।- वैभव रश्मि वर्मा
-
आज ऑफिस जाते वक़्त जब घर से कार ले कर निकला ही था के कुछ दूर जाते ही कार ख़राब हो गयी। पास के गैराज में जा कर मिस्त्री को दे आया के शाम तक...
-
वो तो माँ थी जो सब सह गयी। कभी खाना पसंद का न था तो कभी पहनने को कपड़े, फिर भी वो चुप थी। ऑफिस की गुस्सा उसपर चिल्ला कर निकालना भी तुम्हे सही...
No comments:
Post a Comment