Saturday, April 14, 2018

शब-ए-इश्क़

शब-ए-इश्क़ में हम तो तेरे हुस्न के आफ़ताब का इंतज़ार करते है

है तुमसे मोहब्बत हमे कितनी इस बात का इज़हार करते है

है खड़े उस मोड़ पे हम आज भी देखो

तुम भी करो इज़हार बस यही फरियाद करते है-VAIBHAVRV

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 कुछ मुझ सा ही मुझमे रहता है। कौन हूँ मै बस रोज यही कहता है।।- वैभव रश्मि वर्मा