ढूँढते रहे मोहब्बत गली बाज़ारो में वैभव
पर मोहब्बत करने वाली कोई मिली नही है
रात तारो की छांव में कर लेते याद हम भी
पर तारो भरी रात कोई मिली नही है
बता देते तुमको के कितना किया है इंतज़ार हमने
पर करते किसी का इंतज़ार ऐसी हसीन मिली नही है - VAIBHAVRV
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