Sunday, August 21, 2022

सिलवटें

 हमारे इश्क़ का वो सबूत मांगते है।

कभी लबों का मिलना कभी एक रात मांगते है।।


हम इश्क़ में खुद को मिटा देते पर 

वो हैं कि बस चादरों की सिलवटें मांगते है।।-वैभव रश्मि वर्मा

 कुछ मुझ सा ही मुझमे रहता है। कौन हूँ मै बस रोज यही कहता है।।- वैभव रश्मि वर्मा