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Wednesday, October 13, 2021

अधूरे ख़्वाब

1.ज़िंदगी थोड़ी खुशनुमा हो जाती जो तुम साथ होती।
कि देखो अब आँखों की नमी जाती ही नही जो तुम साथ नही।।
अब तो तन्हाइयां अक़्सर रुला जाती है।
हाँ जब ये फ़ैली बाहें बिन तुम्हारे सिमट जाती है।।
कैसे बताएं कि इश्क़ तो आज भी उतना ही है।
बस तुम्हारे रूठ जाने का डर कुछ कहने नही देता।।



2. कितने ज़ख़्मो को दिल मे छिपाया है तुमने।
फिर से किसी को मोहब्बत बनाया है तुमने।।

वो था न मोहब्बत के क़ाबिल कभी, 
फिर भी काट दी इंतज़ार में कितनी रातें तुमने।
अब आईने को गौर से देखो ज़रा,
क्या फिर सुनी माँग को सजाया है तुमने।।-वैभव रश्मि वर्मा


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