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Wednesday, February 17, 2021

सुनो न

सुनो न!

कि अब ज़िन्दगी तुम्हारे सिवा कुछ भाता नही है।ग़ज़ल में तुम्हारे नाम के सिवा कुछ आता नही है।।


पूछते तो है लोग अक़्सर हाल-ए-दिल मगर।जिया जाय कैसे बदहाली में कोई बताता नह है।।


कभी धूप कभी बारिश ने इनको रोका है मगर।

इस गरीब की गरीबी को किसी न रोक नही है।।


सुनो न!

कि अब ज़िन्दगी तुम्हारे सिवा कुछ भाता नही है।ग़ज़ल में तुम्हारे नाम के सिवा कुछ आता नही है।।- वैभव रश्मि वर्मा

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