मेरे लफ़्ज़ों से
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Friday, February 14, 2020
क्या सुनाऊँ
तुम्हे मेरी मोहब्बत के फ़साने क्या सुनाऊँ।
जो रहे अधूरे को तराने क्या सुनाऊँ।।
होती होगी ग़ैरों से मुलाकात तुम्हारी।
हम तो रहे भीड़ में भी अकेले ये किसको बताऊं।।-VAIBHAV RASHMI VERMA
©merelafzonse
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