मेरे लफ़्ज़ों से
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Monday, May 7, 2018
मोहब्बत
ये जो रंग उड़ने रे लगे है गुलाल बनके
वो रंग तेरी मोहब्बत में हसीन लगते है
महफ़िल में न हँसते थे कभी वो लब तन्हाई में मुस्कुराने लगे है -VAI
BHAVRV
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