हिंदी शायरी, हिंदी कहानी, स्वरचित रचना
हम दिल लगाए बैठे है सब होश गवाएं बैठे है। छांव में चाँद सितारों की सौ अरमान सजाये बैठे है।। नज़रे चुराए बैठे है हम होंठों को दबाये बैठे है। हाँ हम पागल आशिक़ है दिल में आग जलाये बैठे है।। हम दिल लगाए बैठे है सब होश गवाएं बैठे है। - VAIBHAVRV
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कुछ मुझ सा ही मुझमे रहता है। कौन हूँ मै बस रोज यही कहता है।।- वैभव रश्मि वर्मा
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