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Wednesday, November 13, 2024

 यूँ तो हैँ बहुत ख़्वाहिशे लिए दिल मे, 

एक दो मुझे कहने दोगे क्या।

अकेले चलते कट गयी है जिंदिगी मेरी, अब साथ अपने चलने दोगे क्या।।

छूटे है कई हाथ सफ़र मे मेरे, आख़िरी साँस तक चलूँ साथ तेरे, ऐसा हाथ थामने दोगे क्या।। - वैभव रश्मि वर्मा