Pages

Thursday, January 21, 2021

वो तो माँ थी

वो तो माँ थी जो सब सह गयी।
कभी खाना पसंद का न था तो कभी पहनने को कपड़े, फिर भी वो चुप थी।
ऑफिस की गुस्सा उसपर चिल्ला कर निकालना भी तुम्हे सही लगा, पर उसने कुछ नही कहा।।
वो तो माँ थी जो सब सह गयी।
खुद भूखी रहती थी पर तुम्हारे लिखे बचा के रखती थी।
खुद बीमार थी पर तुम्हारे रोने भर से रात भर जागी थी।।
सारी उम्र लोगो के ताने सुने थे इसलिए तुमको कहाँ कुछ कहती थी।
तुम्हारी गुस्से में कही बातें चुभती थी पर वो कहाँ कुछ कहती थी।।
वो तो माँ थी जो सब सह गयी।-VAIBHAV RASHMI VERMA

Wednesday, January 20, 2021

रिश्तों की समझ

अजीब रिवाज़ है इस दुनिया का घर मे बेटी जन्म ले तो हज़ारो ताने मारे जाते है और बेटा जन्म ले तो लड्डू बाँटे जाते है।
पर जब यही बच्चे बड़े हो जाते है तो माँ बाप के प्यार में अंतर आ जाता है।
जन्म से लेकर शादी तक लड़के को जितना प्यार किया जाता है न शादी के बाद वो बदल जाता है।
और जितने ताने लड़की ने सुने होते है वो भी बंद हो जाते है। या यूँ कहें कि लड़के और लड़की की जगह बदल जाती है।
बेटी की शादी के बाद वो ससुराल चली गई उसका पति उसकी हर बात मानता है उसे घुमाने ले जाता है, इस बात पर माँ खुश होती है पर शादी के बाद अगर लड़का अपनी पत्नि के साथ ऐसा करे तो जोरु का गुलाम बन गया है।
भाई की शादी के बाद अगर भाभी भाई को माँ के पास न बैठने दे तो भाभी तो अपने पति को अपनी सास से छीन रही है।
और जब खुद का पति अपनी माँ के पास बैठ जाये तो सास को ताना की वो तो मेरे पति को पल्लू से बाँध के रखना चाहती है।
खुद की माँ जब बहु को कुछ कहें या डाँट दे तो माँ ने तो घर को संभाल रखा है वरना भाभी ने तो घर बर्बाद कर देना था, और जब खुद की सास यही सब करे तो वो तानाशाही कर रही है जुल्म करती है।
अपनी माँ  माँ है और पति की माँ दुश्मन।
तुम्हारा पति तुम्हारी सुने तो अच्छा पति और तुम्हारा भाई अपनी पत्नि की सुने तो जोरु का गुलाम।

जितनी देर में आप लोग ये सब पढ़ रहे है न उतनी देर में अपने देश में कम से कम सौ घरों में यही बात हो रही है।
कहीं कोई माँ अपनी बहू को ताने मार रही है तो कहीं कोई सास अपने दामाद की तारीफ कर रही है।
VAIBHAV RASHMI VERMA


Tuesday, January 19, 2021

ये कैसा इश्क़


कितने अजीब है हम लोग प्यार को समझ नही पाते और प्यार की परिभाषा बनाने बैठ जाते है।
कोई कहता है कि प्यार तो ऐसा होना चाहिए कि जान देदो।
तो कोई कहता है कि प्यार तो तब सफल है जब तुम उसी से शादी करो जिससे तुम प्यार करते हो।
और आजकल तो प्यार के मायने ही बदल गए है प्यार के नाम पर बस होटल का कमरा रह गया है तुम होटल का कमरा बुक करवा लेते हो तो प्यार सच्चा नही तो सब झूठ।
क्या सच मे यही रह गयी है प्यार की परिभाषा
मतलब अब प्यार को साबित करने के लिए जिस्मों का मिलना अहमियत रखता है।
ये कैसा प्यार है जहां एक दूसरे की खुशी मायने नही रखती, सुख दुःख में साथ निभाने नही होता, एक दूसरे को समझना जरूरी नही रह गया है। अगर यही प्यार है तो मैं यही कहूँगा की मुझे न तो प्यार हुआ है न ऐसा प्यार करना है।
जहां हम यह भी न देख सके कि हमारे साथी को किस बात का दुःख है उसे सहारे की ज़रूरत है उस प्यार का क्या फायदा।
VAIBHAV RASHMI VERMA