मेरे लफ़्ज़ों से
हिंदी शायरी, हिंदी कहानी, स्वरचित रचना
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Tuesday, December 22, 2020
मेरे लफ़्ज़ों से
वो रोज़ कुछ यूँ मुझे मिलने आती है।
हाथ लगाती भी नही और रूह को छू जाती है।।-VAIBHAV RASHMI VERMA
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